एक लड़की सड़क पर बेतहाशा दौड़े जा रही थीं। तभी अचानक वो एक पत्थर से टकराकर गिर गई। वो उठने की कोशिश कर ही रही थीं कि तभी कुछ लोगो ने आकर उसे चारो तरफ़ से घेर लिया।
वहीं एक दिन पहले.
एक 30 माले की बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर थ्री पीस सूट पहने एक शख़्स बड़े से ग्लास वॉल के सामने खड़ा था, जहां से पुरा मुंबई शहर दिखाई दे रहा था।
वह शख़्स अपने दोनों हाथो को अपनी पेंट की जेब में डाले कुछ सोच रहा था। तभी उस शख़्स का फ़ोन रिंग हुआ। उसने अपने एक हाथ से फोन पिक करते हुए अपने दुसरे हाथ से आंखो पर चढ़ा शेड्स हटाया। जब उसने दूसरी तरफ़ की बाते सुनी तो उसकी हाथों की पकड़ फ़ोन पर कस गई और तभी उसने अपनी रौबदार आवाज़ में फोन की दुसरी तरफ वाले आदमी से कहा, " मुझे वो लड़की चाहिए ! अगले 24 घंटे में वो लड़की मुझे मेरी आंखों के सामने चाहिए ! "
उसकी आवाज में इतनी एरोगेंस थीं कि फोन की दुसरी तरफ वाला आदमी उसकी आवाज़ सुनकर घबरा गया। फिर उसने अटकते हुए कहा, " ओ.ओके सर। "
उसके बोलने के अगले पल ही कॉल कट हो गई।
कॉल कट होते ही उस आदमी ने अपने माथे पर आए पसीने को पोंछा और वहां खड़े सभी लोगों को देखते हुए कहा, " हमें 24 घंटे में कैसे भी उस लड़की को ढूंढना है.सो हैरी अप. जल्दी से अपने काम पर लग जाओ। "
उस आदमी की बात सुनकर सभी अलर्ट हो गए और अपने अपने इनफॉर्मर को कॉल करने लगें।
उधर वह शख़्स अभी भी ग्लास वॉल के सामने खड़ा था। फिर उसने खुद से कहा, " तुम्हें तो मैं ढुंढ निकालूंगा । तुम इस दुनियां के किसी भी कोने में क्यों ना छुपी हो, मैं तुम्हें ढुंढ निकालूंगा। "
वहीं दुसरी तरफ नेशनल मेडिकल कॉलेज में, एक लड़की बार बार सुहानी का नाम लेते हुए कॉरिडोर में उसे ढूंढ रही थी। फिर उस लड़की ने वहां खड़े सभी लोगों से पूछा, " रवि तुने सुहानी को देखा क्या ? नैना तुने देखा ? पायल तूने देखा क्या ? "
तभी पायल ने उस लड़की की बात पर जल्दी से कहा, " हां अंशिका, वह लैब में है । "
अंशिका, पायल की बात पर स्माइल करते हुए बोली, " थैंक्यू यार। "
इतना बोलकर अंशिका लैब की तरफ चली गई। लैब के अंदर जाते हीं अंशिका की नज़रे चारों ओर सुहानी को ढूंढने लगी। तभी सुहानी को देखकर वह जल्दी से उसके पास गई और उसे पिछे से हग करते हुए बोली, " तु यहां है ! मैं तुझे कब से ढूंढ रही थी। "
सुहानी पीछे मुड़ते हुए अंशिका से बोली, " क्या हुआ ? क्यों ढूंढ रही थी ? "
तभी अंशिका ने सुहानी को देख घबराते हुए कहा, " यार ! जब मैं कॉलेज आ रही थी तो मैंने देखा कि कुछ लोग तेरा स्कैच दिखाकर तुझे ढूंढ रहे थे ।"
सुहानी, अंशिका की बात सुनते ही घबरा गई । उसके हाथ में पकड़ा हुआ पैन भी छूटकर नीचे गिर गया।
तभी सुहानी ने डरते हुए कहा, " क्या ? वह लोग कॉलेज के बाहर है ?"
अंशिका, सुहानी की बात का जवाब देते हुए बोली, " नहीं, वह लोग तुझे मार्केट एरिया में ढूंढ रहे थे। "
यह सुनकर सुहानी ने फिर से कहा, " तुने उन्हें कुछ बताया तो नहीं ? "
जिस पर अंशिका ना में सिर हिलाते हुए बोली, " नहीं. मैने उन्हें कुछ नहीं कहा। वैसे वह लोग तुझे क्यों ढूंढ रहे हैं ? कहीं वह उसके आदमी तो नहीं ! "
सुहानी ने अंशिका की बात पर सोचते हुए कहा, " पता नहीं ।"
अंशिका भी सोचते हुए बोली, " हां यार, वह लोग नही हो सकते। उन लोगों को तो तेरे बारे में सब पता है और उसने तो तेरे पीछे अपने गार्ड भी लगा रखे हैं । "
फिर थोड़ी देर रुककर उसने सुहानी को देखते हुए रूडली कहा, " अब यह नया कौन आ गया ? क्या मुसीबत है, सब तेरे पीछे ही क्यों पड़े है ?"
यह सुनकर सुहानी घबराते हुए बोली, " पता नहीं यार ।"
फिर अंशिका, सुहानी के कंधे को पकड़कर समझाते हुए बोली, " नहीं पता तो पता कर लेंगे यार ! तु ज्यादा परेशान मत हो, हम सब तेरे साथ हैं। "
यह सुन सुहानी, अंशिका की तरफ देखते हुए बोली, " मुझे अभी घर जाना होगा ! तु मेरा असाइनमेंट सबमिट कर देना ।"
तभी अंशिका ने सुहानी को रोकते हुए कहा, " पर तेरे नोट्स ? "
यह सुन सुहानी जाते हुए पीछे मुड़कर बोली, " वह मैं बाद में ले लूंगी। "
यह कहकर वह लॉकर रूम में गई और उसने अपनी व्हाईट शर्ट उतारकर लॉकर में रख दी और एक स्कार्फ से अपने फेस को कवर कर लिया और फिर कॉलेज से बाहर चली गई।
सुहानी फिर जब घर पहुंची तो अपने घर के बाहर खड़े गार्ड को देखकर दांत पिसते हुए खुद से बोली, " क्या करूं मैं ? कैसे इन लोगो से अपना पीछा छुड़ाऊं ? राक्षस कहीं के ! क्या बिगाड़ा है मैने इनका ? "
यह कहकर वह चेहरे से स्कार्फ हटाकर एक नकली हंसी हसते हुए आगे बढ़ी और गार्ड को देखते हुए अंदर चली गई।
घर के अन्दर जाते ही उसने दरवाजे को अंदर से बंद कर दिया। फिर उसने घर में इधर – उधर देखा। जब उसे कोई नजर नही आया तो वह सीधे अपनी मामी के कमरे में चली गई।
कमरे के अंदर सुहानी के मामा, अनंत सिंह और मामी ऐश्वर्या दोनों बैठेकर बातें कर रहे थे। तभी सुहानी ने अपने मामा अनंत की तरफ देखकर कहा, " मामा जी ! कुछ लोग मेरा स्कैच लेकर मुझे ढूंढ रहे हैं। "
सुहानी की यह बात सुनकर दोनों ही चौंक गए और एक दूसरे को देखने लगें। तभी सुहानी की मामी अपने पति अनंत की तरफ देखकर घबराते हुए बोली, " कहीं सुहानी को वह लोग तो नही ढूंढ रहे हैं ! "
अनंत, ऐश्वर्या की बात पर सर हिलाते हुए बोले, " नही ! ऐसा नही हो सकता। उन लोगों को तो पता भी नहीं है कि सुहानी जिन्दा है या नही ! "
यह सुन ऐश्वर्या, अनंत को सवालिया नजरो से देखते हुए बोली, " फिर कौन लोग हो सकते है ? राघव के आदमी तो हमारे साथ हीं रहते है । 24 घंटे हम पर गिद्ध की तरह नजरे गड़ाए रहते हैं। "
अनंत ने फिर सोचते हुए कहा, " यह तो पता नहीं, पर अब हमे और भी ज्यादा संभलकर रहना होगा। "
तभी सुहानी ने इधर–उधर देखते हुए कहा, " मामा जी, आशु कहां है ?"
यह सुन ऐश्वर्या, सुहानी को देखते हुए बोली, " आशु असाइनमेंट सबमिट करने के लिए अपनी फ्रेंड्स के साथ कॉलेज गई है। "
वहीं दुसरी ओर, कुछ लोग एक लड़की का स्कैच दिखाकर उसे ढूंढ रहे थे पर उन्हें कहीं भी उस लड़की का कुछ पता नहीं चला। फिर वह थक हारकर वापस अपने बॉस के पास आ गए।
एक शख़्स जो रोलिंग चेयर पर बैठा था। वह अपनी कड़क आवाज में उन लोगों को देखकर बोला, " कुछ पता चला ? "
उसके पूछने पर सामने खड़े सारे आदमियों ने ना में सिर हिलाया। यह देखकर वह शख़्स अपनी चेयर से खड़ा हुआ और गुस्से में उन्हें घूरते हुए बोला, " कैसे भी करके 24 घंटे में उस लड़की को ढूंढो ! अगर वह नही मिली तो खुद को गोली मार लेना ।"
उसकी बात सुनते ही सब लोग डर से कांपने लगे। तभी सामने खड़े आदमियो में से एक आदमी ने कहा, " शिवा सर ! सिर्फ़ स्कैच दिखाकर हम उस लड़की को नहीं ढूंढ सकते ! "
शिवा उस आदमी को घूरते हुए बोला, " मुझे नही पता कि तुम उस लड़की को कैसे ढूंढोगे ? तुम्हें उस लड़की को ढूंढना ही होगा ! वरना तुम्हें इतनी भयानक मौत मिलेगी, जिसके बारे में तुम लोग सोच भी नहीं सकते। "
शिवा की बात सुनकर वह सभी डर गए और वापस से उस लड़की को ढूंढ़ने चले गए। उनके जाने के बाद शिवा ने अपनी जेब से फोन निकाला और एक नम्बर डायल कर के फोन कान पर रखते हुए दुसरी तरफ चला गया।
वहीं उधर सुहानी के मामा अनंत किसी काम से बाहर आए थे। फिर वह एक शॉप पर गए और वहां से उन्होंने कुछ खरीदा। शॉप वाले ने उन्हें सामान के साथ बड़ी ही चालाकी से एक लिफाफा भी दे दिया। अनंत ने सबसे छुपाते हुए उस लिफाफे को अपनी जेब में रख लिया और वहां से चले गए।
वह थोड़ी दूर चले हीं थे कि तभी एक आदमी ने उन्हें एक स्कैच दिखाकर पूछा, " क्या आपने इस लड़की को देखा है ? "
अनंत उस स्कैच को देखकर घबरा गए और मन ही मन खुद से बोले, " यह तो सुहानी का स्कैच है ! "
फिर उन्होंने अपने चेहरे पर आए भावों को छुपाते हुए ना में सिर हिला दिया और आगे बढ़ गए।
फिर जब वह घर पहुंचे तो अपने घर के बाहर खड़े गार्ड को देखकर सोचते हुए खुद से बोले, " आगे कुआं और पीछे खाई ! ऊपर वाले ने तो हमारे पास कोई रास्ता ही नही छोड़ा ! "
यह कहकर जब वह घर के अंदर आए तो उन्होंने देखा कि सुहानी और ऐश्वर्या किचन में थीं तो वही आशु सोफे पर बैठी अपनी बुक्स पढ़ रही थी। फिर अनंत सभी को अपने कमरे में आने का बोलकर अपने कमरे में चले गए।
कुछ ही मिनटों बाद सब अनंत के सामने खड़े थे। फिर अनंत ने सुहानी को देखते हुए कहा, " मैं अभी मार्केट गया था। वहां एक नही, काफी सारे आदमियो के हाथ में तुम्हारा स्कैच था। उनमें से एक ने मुझे तुम्हारा स्कैच दिखाकर तुम्हारे बारे में पुछा। उन्हें तो मैं चकमा दे आया, पर अब तुम्हारा यहां रहना ठीक नही है सुहानी ! तुम्हें आज रात हीं यह घर छोड़कर जाना होगा ! "
यह सुनकर ऐश्वर्या, सुहानी की तरफ देखकर बोली, " मेरी बच्ची अकेली कहां जाएगी ? "
ऐश्वर्या की आवाज में मायूसी और घबराहट दोनों ही थीं।
तभी अनंत, ऐश्वर्या की तरफ देखकर थोड़े गुस्से में बोले, " तुम सोच भी कैसे सकती हो कि मैं सुहानी को अकेले छोड़ सकता हूं ? "
फिर अनंत ने सुहानी की तरफ देखते हुए आगे कहा, " तुम यहां से पुणे जाओगी ! वहां मेरा एक दोस्त है, वह तुम्हें लेने आ जाएगा ! हम सब एक साथ नही जा सकते हैं ! बाहर राघव के आदमी पहरा दे रहे है, उनके रहते हम सभी यहां से एक साथ नही निकल सकते ! "
सुहानी अपने मामा की बातो को अच्छे से समझ रही थीं। फिर उसने उनकी तरफ देखकर कहा, " ठीक है मामा जी ! मैं तैयार हूं ! "
रात होते ही फिर सुहानी अपना सामान पैक करके जाने के लिए तैयार खड़ी थी। सुहानी को इस तरह भेजना ऐश्वर्या और अनंत के लिए मुश्किल था, आखिर ऐश्वर्या ने सुहानी को अपनी माँ की तरह बचपन से जो पाला था। लेकिन हालत की घंभीरता को समझते हुए अनंत और ऐश्वर्या ने यह फैसला लिया था।
अनंत ने सुहानी को देखते हुए पूछा, " बेटा तुम्हे डर तो नही लग रहा है ? "
उन्हें परेशान देखकर सुहानी ने कहा, " नहीं मामा जी, मुझे डर नही लग रहा है। बस मुझे आप लोगों की चिंता हो रही है ! "
तभी आशु, सुहानी के गले लग गई और रोते हुए बोली, " दीदी, आप अपना ख्याल रखना। "
सुहानी, आशु से अलग हुई और उसके आंसु पोछते हुए बोली, " तु चिंता मत कर आशु, एक दिन मैं सब ठीक कर दुंगी। फिर हम सब खुशी– खुशी एक साथ रहेंगे ! फिर हमे किसी से भी भागने और छिपने की जरुरत नही होगी ! "
तभी ऐश्वर्या आगे आकर दोनो को गले लगाते हुए बोली, " एक दिन सब ठीक हो जायेगा मेरी बच्ची ! "
यह कहकर ऐश्वर्या ने सुहानी के माथे को चूम लिया।
फिर सुहानी को देखकर अनंत ने कहा, " 10 बज गए हैं, 12 बजे तुम्हारी बस है ! "
फिर बस की टिकट सुहानी को देते हुए उन्होंने आगे कहा, " जैसा हमने प्लान किया था, सब वैसा ही करना। "
यह सुनकर आशु, सुहानी के कमरे में चली गई और सुहानी किचन में छुप गई। ऐश्वर्या हॉल में ही खड़ी थी। अनंत उन्हें हिम्मत रखने का इशारा करते हुए बाहर खड़े गार्ड के पास चले गए।
फिर उन्होंने दोनों गार्ड्स को देखते हुए कहा, " मुझे ऐसा लग रहा है कि घर में कोई अंजान आदमी घुस गया है ! "
यह सुन गार्ड ने अनंत को देखते हुए कहा, " हम तो यहां से हिले भी नही हैं और हमने किसी को जाते हुए भी नही देखा, फिर कैसे कोई घुस सकता है ? "
अनंत ने दोनो को देख आगे कहा, " ठीक है, मत मानो। अगर कुछ हो गया तो मैं यह सारी बाते राघव को बता दूंगा । "
राघव का नाम सुनते ही वह दोनो गार्ड्स डर गए। डर की झलक अनंत दोनों के चेहरे पर साफ देख पा रहे थे। तभी दोनों में से एक गार्ड ने डरते हुए कहा, " सर से कुछ मत कहना। हम अभी चैक करते हैं। "
यह कहकर वह दोनो घर के अंदर गए। अनंत दोनों को अपने कमरे की तरफ ले गए । दोनों गार्ड्स के कमरे में जाते ही सुहानी, किचन से बाहर आई और ऐश्वर्या को गले लगाकर बाहर निकल गई।
वह पीछे देखे बिना हीं सड़क पर दौड़े जा रही थी। उसकी पीठ पर एक छोटा
सा बैग था। उसने अपना चेहरा स्कार्फ से कवर कर रखा था और वह बेतहाशा सड़क पर भागे जा रही थी। उसे कैसे भी करके 12 बजे से पहले बस स्टैंड पहुंचना था।
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